महिला आईटीआई कॉलेज को चालू होने का इंतजार

लड़कियों को आईटीआई के माध्यम से प्रशिक्षित कर तकनीकी रुप से हुनरमंद बनाने की योजना बोकारो में पूरी तरह से खटाई में पड़ गयी है. सरकार ने चार करोड़ की लागत से महिला आईटीआई का निर्माण कराया था और इसके लिए बकायदा 40 लाख की लागत से एक छात्रावास की भी व्यवस्था करायी गयी थी. लेकिन आज पांच साल के बाद कॉलेज और छात्रावास सफेद हाथी बनकर रह गए हैं.

लड़कियों को आईटीआई के माध्यम से प्रशिक्षित कर तकनीकी रुप से हुनरमंद बनाने की योजना बोकारो में पूरी तरह से खटाई में पड़ गयी है. सरकार ने चार करोड़ की लागत से महिला आईटीआई का निर्माण कराया था और इसके लिए बकायदा 40 लाख की लागत से एक छात्रावास की भी व्यवस्था करायी गयी थी. लेकिन आज पांच साल के बाद कॉलेज और छात्रावास सफेद हाथी बनकर रह गए हैं.

11 मार्च 2012 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ,उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो और वर्तमान मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ,सासंद और स्थानीय विधायकों की मौजदूगी में चास एनएच 32 के किनारे महिला आईटीआई का उदधाटन किया गया था. बोकारो के साथ-साथ आसपास की रहने वाली गरीब छात्राओं को यह आशा जगी थी कि अब तकनीकी प्रशिक्षण पाकर वे रोजगार पा सकेंगे. लेकिन यह आशा सिर्फ आशा बनकर रह गयी. पांच साल के बाद भी यह न तो खुला है और न ही श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग इसकी ओर कोई ध्यान दे रहा है.

सबसे बड़ी बात यह है कि इसके ठीक दूसरी तरफ लड़कों का आईटीआई कॉलेज है,  जहां गरीब बच्चे दूर-दूर से पढ़ने आते हैं . लेकिन इनका कहना है कि सरकार बिल्डिंग तो बनाती है मगर खंडहर में तब्दील होने छोड़ देती है. अगर उन जैसे गरीब छात्रों को यहां छात्रावास उपलब्ध हो जाता, तो उन्हें धनबाद ,बेरमो या अन्य दूर-दराज इलाकों से रोज आना-जाना नहीं करना पड़ता