पढ़ाई टिप्स

पढ़ाई का सही वक्त

पढ़ाई का सही वक्त

पढ़ाई का सही वक्त हर व्यक्ति की आदतों, जीवनशैली और ऊर्जा स्तर पर निर्भर करता है, लेकिन वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से कुछ समय ऐसे माने जाते हैं जब पढ़ाई करना अधिक प्रभावशाली होता है।


पढ़ाई के लिए सबसे अच्छे समय:

1. सुबह का समय (5 बजे से 8 बजे तक)

  • दिमाग एकदम ताज़ा होता है

  • एकाग्रता उच्च स्तर पर होती है

  • वातावरण शांत होता है

  • नया विषय या कठिन विषय पढ़ने के लिए उपयुक्त समय

अच्छा रिजल्ट पाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से रिपीट करना इम्पॉर्टेट है।

अच्छा रिजल्ट पाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से रिपीट करना इम्पॉर्टेट है।

वैज्ञानिक तरीके से रिपीट करना क्यों जरूरी है?

दिमाग की भूलने की प्रवृत्ति (Forgetting Curve)

हमारा दिमाग जो जानकारी एक बार पढ़ता है, उसे समय के साथ भूलने लगता है। रिसर्च के अनुसार, अगर हम दोहराते नहीं हैं, तो 24 घंटे के भीतर हम 50% से अधिक जानकारी भूल सकते हैं।

Spaced Repetition क्या है?

यह एक वैज्ञानिक अध्ययन तकनीक है जिसमें किसी जानकारी को तय अंतराल पर दोहराया जाता है, जिससे वह लंबे समय तक याद रहती है। इस तकनीक में हर बार रिपीट करने का समय थोड़ा बढ़ा दिया जाता है।

उदाहरण:

  • पहला रिपीट – उसी दिन

कैसे बढ़ाओगे कॉन्सन्ट्रेशन पावर?

कैसे बढ़ाओगे कॉन्सन्ट्रेशन पावर?

जब तुम अपनी पसंद की फिल्म देखने जाते हो तो तीन घंटे उसी में आंखें गड़ाए बैठे रहते हो। उसी तरह क्रिकेट मैच में खाना-पीना छोड़कर एकटक उसे देखते रहते हो। तुम खुद को उसी में लगा देते हो, लेकिन पढ़ाई करते हुए ध्यान बंटने में ज्यादा टाइम नहीं लगता। अगर मीलों दूर म्यूजिक बज रहा हो तो जैसे पढ़ाई से ध्यान हटाने का बहाना मिल गया हो, तुम्हारा ध्यान तुरंत पढ़ाई से हट जाता है।

पहले समझो कॉन्सन्ट्रेशन का मीनिंग
इसे समझने के लिए हमें ‘रुचि’ को अच्छे ढंग से समझना होगा। इमेजिन करो कि तुम्हें पिछले वीक पार्टी के फोटो दिए जाते हैं, जिसमें तुम भी थे। तुम उन फोटो में क्या देखोगे?

कठिन समय में भी बनाए रखें धैर्य और नकारात्मक विचारों से रहें दूर

कठिन समय में भी बनाए रखें धैर्य और नकारात्मक विचारों से रहें दूर
  • नई दिल्ली/राजीव कुमार। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि समय और परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं होती है। हर व्यक्ति के जीवन में कभी अच्छा समय आता है, तो कभी बुरे दौर से उसे गुजरना पड़ता है, लेकिन ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति की पहचान उसके बुरे दौर में ही होती है। ऐसा कहने के पीछे सबसे बड़ा कारण यही है कि जीवन के अच्छे दौर में तो सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी सही फैसला करने में सक्षम होता है लेकिन जब स्थिति प्रतिकूल हो, तो उस समय व्यक्ति की सही प्रतिभा का आकलन किया जाता है।

 

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