Anand's blog

क्या है न्यूरोडेवेलेपमेंटल डिसऑर्डर?

क्या है न्यूरोडेवेलेपमेंटल डिसऑर्डर?

अमरीकी शोधकर्ताओं का कहना है कि एचआईवी से निपटने के लिए वैक्सीन बनाने में गाय काफी मददगार साबित हो सकती है.

प्रतिरक्षा के तौर पर ये जानवर लगातार ऐसे विशेष एंटीबॉडीज प्रोड्यूस करते हैं जिनके जरिए एचआईवी को खत्म किया जा सकता है.

ऐसा माना जा रहा है कि कॉप्लेक्स और बैक्टीरिया युक्त पाचन तंत्र की वजह से गायों में प्रतिरक्षा की क्षमता ज़्यादा विकसित हो जाती है.

अमरीका के नेशनल इंस्टीच्यूट्स ऑफ़ हेल्थ ने इस नई जानकारी को बेहतरीन बताया है.

क्या है न्यूरोडेवेलेपमेंटल डिसऑर्डर?

क्या है न्यूरोडेवेलेपमेंटल डिसऑर्डर?

एडीएचडी, यानि एक तरह का न्यूरोडेवेलेपमेंटल डिसऑर्डर. आम तौर पर ये लड़कियों के मुक़ाबले लड़कों में ज़्यादा पाया जाता है.

लेकिन बहुत सी लड़कियों में ये लड़कों से भी ज़्यादा ख़तरनाक स्तर पर हो सकता है. मुख्य तौर पर ये डिसऑर्डर तीन तरह का होता है.

इसमें मरीज़ का दिमाग़ चीज़ों पर फ़ोकस नहीं कर पाता. छोटी-छोटी चीज़ों को बहुत जल्दी भूलता रहता है. इसका दूसरा रूप हम तब देखते हैं, जब मरीज़ बहुत ज़्यादा एक्टिव और बातूनी हो जाता है. वो कहीं भी घड़ी भर को टिक कर नहीं बैठ पाता.

क्यों विकसित देशों में घट रहा है टीकाकरण पर यकीन-बीबीसी स्पेशल

क्यों विकसित देशों में घट रहा है टीकाकरण पर यकीन-बीबीसी स्पेशल

आम जनता का टीकाकरण में घटता विश्वास समाज को जानलेवा बीमारियों से लड़ने के मामले में एक क़दम पीछे की ओर ढकेल रहा है.

टीकाकरण के प्रति लोगों की राय पर किए गए वैश्विक सर्वे के मुताबिक लोगों का इस प्रक्रिया में यकीन कम होता जा रहा है, दुनिया के कई इलाकों में ये बेहद कम है.

वेलकम ट्रस्ट के एक विश्लेषण में 140 देशों के 1 लाख 40 हज़ार से ज़्यादा लोगों की राय ली गई.

ये सर्वे ऐसे वक़्त में आया है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टीकाकरण के प्रति लोगों की घटती रुचि को दुनिया भर में स्वास्थ्य के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना है.

एसी 24 डिग्री पर सेट करने से क्या हो जाएगा

एसी 24 डिग्री पर सेट करने से क्या हो जाएगा

गर्मी बहुत है यार, एसी चला दे 18 पर!' मई-जून की चिलचिलाती गर्मी हो या फिर बारिश के बाद जुलाई-अगस्त की उमस, दिल्ली समेत उत्तर भारत में एयरकंडिशनर के बिना अब काम नहीं चलता.

एक ज़माना था जब किसी के घर एसी लगने पर उसके रईस होने की चर्चा शुरू हो जाती थी, लेकिन अब खिड़कियों के बाहर टंगे एसी आम बात है.

लेकिन इन दिनों ये एसी दूसरी वजहों से चर्चा में हैं. ख़बरें उड़ी कि एसी को अब 24 डिग्री सेल्सियस तापमान से नीचे नहीं चलाया जा सकेगा.

इससे तेज चाकू नहीं बना

इससे तेज चाकू नहीं बना

दमिश्क के लोहार बेहद तेज और लचकदार चाकू और तलवार बनाने में महारथ रखते थे. उनका तरीका अब चलन में नहीं है. लेकिन एक जर्मन लोहार ने उसी तरीके को इस्तेमाल करते हुए दुनिया का सबसे तेज और सबसे महंगा चाकू बनाया है. ऐसे एक चाकू की कीमत तीन लाख रुपये से भी ज्यादा है. चलिए देखते हैं कि ये चाकू कैसे बनता है

भूकंप भविष्यवाणी की तकनीक खोज रहे हैं भारतीय वैज्ञानिक

भूकंप भविष्यवाणी की तकनीक खोज रहे हैं भारतीय वैज्ञानिक

भूकंप आखिर क्यों आता है? इस अनसुलझे रहस्य का पता लगाने के लिए देश के वैज्ञानिक अब तक की सबसे बड़ी रिसर्च में लगे हुए हैं.
हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय भू-भौतिकी अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) वैज्ञानिकों ने इसके लिए महाराष्ट्र के कोयना में जमीन के 7 किमी अदंर होने वाली हलचलों का अध्यन शुरु किया है.

नए डायनासोर

नए डायनासोर

ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में खुदाई के दौरान वैज्ञानिकों को डायनासोर की तीन नई प्रजातियों के जीवाश्म मिले हैं.

पीएलओएस वन पत्रिका में वैज्ञानिकों ने लिखा है कि इन तीनों में से एक ज़बर्दस्त शिकारी हुआ करता था जिसके दोनों पंजों में बड़े बड़े नाखून हुआ करते थे.

बाकी दोनों डायनासोर शाकाहारी हैं जिसमें से एक ज़िराफ़ जैसा ऊंचा था जबकि तीसरा दरियाई घोड़े के आकार का हुआ करता था.

ये तीनों ही जीवाश्म क़रीब दस करोड़ वर्ष पहले के हैं और पत्थरों के बीच दबे हुए मिले हैं. इन तीनों का नाम ऑस्ट्रेलिया के लोकप्रिय गीत वाल्टजिंग माटिल्डा के चरित्रों पर रखे हैं.

चीन का वो स्कूल जहां डेटिंग सिखाई जाती है

चीन का वो स्कूल जहां डेटिंग सिखाई जाती है

आप को डेटिंग पर जाना है?

क्या आप को डेटिंग के तौर-तरीक़े पता हैं? क्या आप को मालूम है कि प्यार-मोहब्बत की मुलाक़ातों-बातों में आप को हमेशा बेहद संवेदनशील और अपने साथी के जज़्बातों का ख़याल रखने वाला होना है? क्या आप को मालूम है कि कामयाब डेटिंग के लिए आप को अच्छे से डांस करना आना चाहिए?

अगर आपका जवाब ना है, तो इन मुश्किलों का हल है हमारे पास. चलिए आज आप को ले चलते हैं चीन के डेटिंग स्कूल में. जहां लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है, कामयाब डेटिंग की.

चीन, आबादी के लिहाज़ से दुनिया का सबसे बड़ा देश है. यहां लड़कों की तादाद लड़कियों के मुक़ाबले ज़्यादा है.

मिलिये पक्षी प्रेमी अर्जुन से, जिन्होंने कराई हजारों गौरेया की वापसी

हमारे बचपन की दोस्त गौरैया अब हमारे घर नहीं आती। अपना घर बनाने की चाहत में हमने उनसे उनका प्राकृतिक आवास और भोजन छीन लिया है। यही वजह है कि गौरैया अब हमसे लगातार दूर होती जा रही है और कई क्षेत्रों में तो अब ये देखने को भी नहीं मिलती। लेकिन गौरैया प्रेमी अर्जुन कुमार का कहना है कि अगर हम इनके प्रति थोड़ी सी सहजता दिखाएं, तो अपने बचपन के इन दोस्तों को एक बार फिर अपनी छत के मुंडेर पर वापस बुलाया जा सकता है। इसके लिए बहुत थोड़े से प्रयास की आवश्यकता है। वे स्वयं पिछले दस सालों से ऐसा कर रहे हैं और अब तक दिल्ली से लेकर भोपाल तक हजारों गौरैया को वापस ला चुके हैं। 

ऑनलाइन गुमनाम रहने की तरकीब

ऑनलाइन गुमनाम रहने की तरकीब

इंटरनेट पर अगर कई कंपनियों की नज़रों से बच कर ब्राउज करना है तो वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क या वीपीएन का सहारा लें.
इन पर अगर अपने नाम से लॉग-इन नहीं किया जाए तो वाकई आपकी पहचान करना आसान नहीं होगा.
ऐसे समय में जब हर वक्त आपकी ऑनलाइन आदतों पर कंपनियां नज़र रख रही हैं, वीपीएन आपका सहारा बन सकते हैं.
आपके लिए बढ़िया वीपीएन वो है जो आपके ब्राउज़िंग का रिकॉर्ड अपने पास नहीं रखता है. आइये आपको कुछ ऐसे वीपीएन सर्विस के बारे में बताते हैं.
प्राइवेट इंटरनेट एक्सेस आपके लिए बहुत बढ़िया एन्क्रिप्शन का विकल्प देता है. अगर आप चाहें तो बिना एन्क्रिप्शन के भी काम कर सकते हैं.

क्या दरियाई घोड़ा मांसाहारी है?

क्या दरियाई घोड़ा मांसाहारी है?

दरियाई घोड़ा अपने शरीर और व्यवहार के कारण शुरू से ही उत्सुकता का कारण रहा है.

इस जीव के बारे में जितनी जानकारी है उससे यह माना जाता है कि यह एक शाकाहारी जानवर है.

लेकिन हाल ही में आए एक शोध में इस बात का प्रमाण दिया गया है कि यह मांसाहारी भी है.

वैज्ञानिक इस बात से दंग हैं और इस गुत्थी को सुलझाने में जुट गए हैं.

बरसों से वैज्ञानिकों को हिप्पोपोटैमस के बारे में काफ़ी ग़लतफ़हमी रही है..

प्राचीन ग्रीक भाषा में इनके नाम का मतलब होता है दरियाई घोड़ा, हालाँकि आधुनिक विज्ञान इन्हें सूअर की प्रजाति के नज़दीक पाता है.

ऑनलाइन एडिक्शन (लत) के लक्षण क्या हैं?

ऑनलाइन एडिक्शन (लत) के लक्षण क्या हैं?

डॉक्टर मनोज कहते हैं, ''अगर कोई स्क्रीन के सामने लंबा वक़्त बिता रहा है तो ये एक बड़ा लक्षण है. हमारे यहां जो केस आए हैं, वो 6-7 घंटे स्क्रीन के सामने बैठने के हैं. लेकिन ऐसे भी लोग हैं जो 14-15 घंटे ऑनलाइन वेबसाइट्स को लगातार देखते हैं.''

NIMHANS का मानना है कि एक पहलू ये भी है कि लोग ऑनलाइन स्ट्रीमिंग को सच और असल दुनिया को झूठा मानने लगते हैं. इससे एजुकेशन और शिक्षा पर भी असर होता है.

 

आंकड़े किस ओर इशारा करते हैं?

जींस पहनते समय लड़के करते हैं ये पांच गलतियां

जींस पहनते समय लड़के करते हैं ये पांच गलतियां

महिला हो या पुरुष उनकी ड्रेसिंग में जींस समान होती है, अंतर सिर्फ डिजाइन का होता है। आजकल सभी के लिए जींस पहनना काफी आसान विकल्प बन चुका है क्योंकि इसे कुर्ता, टॉप या शर्ट किसी भी चीज के साथ मैच किया जा सकता है। हालांकि, इसके भी कुछ कायदे होते हैं। खासकर पुरुष जींस पहनते समय कई गलतियां करते हैं, ऐसे में आपके लिए जानना जरुरी है कहीं आप भी तो ये गलतियां नहीं करते। 

#Chandrayaan2: चांद पर जब चंद्रयान-2 उतरेगा तो क्या होगा

#Chandrayaan2: चांद पर जब चंद्रयान-2 उतरेगा तो क्या होगा

भारत का सबसे प्रतिष्ठित अंतरिक्ष कार्यक्रम चंद्रयान-2 दुनिया के तमाम देशों की मुहिम, 'चलो फिर चांद पर चलें' के लिए बेहद अहम इनपुट मुहैया कराएगा.

ये भी हो सकता है कि इसी की बुनियाद पर आगे चल कर इंसान चांद पर पहला पर्यवेक्षण केंद्र भी बनाए.

इमेज कॉपीरइटISRO.GOV.IN

शनिवार को तड़के भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के वैज्ञानिक रिमोट से चंद्रयान मिशन के विक्रम लैंडर को धीरे-धीरे चंद्रमा पर उतारेंगे.

विक्रम लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा. उसे चंद्रमा पर उतरने के लिए ज्वालामुखी के दो गड्ढों के बीच उतरने की जगह चुननी है.

Image captionविक्रम लैंडर

चंद्रयान के बारे में ये सब आपको कहीं भी नहीं पता चलेगा, पढ़ लो.

चंद्रयान के बारे में ये सब आपको कहीं भी नहीं पता चलेगा, पढ़ लो.

आज की रात देश की नींद के वक़्त चंद्रयान – 2 चांद पर उतरेगा. बहुत से लोग होंगे जो जागकर ये जानना चाह रहे होंगे कि क्या हो रहा है, भारत के वैज्ञानिकों की मेहनत कितनी रंग लाई और सबसे ज़रूरी बात? चांद पर हमें क्या मिलने वाला है?

लेकिन इन सब बातों का जवाब तो हमें सितम्बर 6 और 7 की दरम्यानी रात मिलेगा. अनुमानित समय है 1:30 बजे से 2:30 बजे के बीच. लेकिन हम ये भी जानना चाह रहे हैं कि भारत के श्रीहरिकोटा से 22 जुलाई को लॉन्चिंग के बाद चंद्रयान ने कब क्या किया? किस-किस घड़ी चंद्रयान ने कौन-कौन से करतब दिखाए? कैसे पृथ्वी से उठकर चंद्रयान धीरे-धीरे चंद्रमा की ओर पहुंचा? हम बताएंगे आपको.

चंद्रयान-2: चाँद की अधूरी यात्रा में भी क्यों है भारत की एक बड़ी जीत

चंद्रयान-2: चाँद की अधूरी यात्रा में भी क्यों है भारत की एक बड़ी जीत

भारत शुक्रवार की रात इतिहास रचने से दो क़दम दूर रह गया. अगर सब कुछ ठीक रहता तो भारत दुनिया पहला देश बन जाता जिसका अंतरिक्षयान चन्द्रमा की सतह के दक्षिणी ध्रुव के क़रीब उतरता.

इससे पहले अमरीका, रूस और चीन ने चन्द्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैन्डिंग करवाई थी लेकिन दक्षिणी ध्रुव पर नहीं. कहा जा रहा है कि दक्षिणी ध्रुव पर जाना बहुत जटिल था इसलिए भी भारत का मून मिशन चन्द्रमा की सतह से 2.1 किलोमीटर दूर रह गया.

शुक्रवार की रात चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर बस उतरने ही वाला था कि लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया. संपर्क टूटने से पहले चंद्रमा की सतह से दूरी महज 2.1 किलोमीटर बची थी.

कुछ लोग लेफ़्ट हैंड से क्यों लिखते हैं?

कुछ लोग लेफ़्ट हैंड से क्यों लिखते हैं?

दुनिया में कुछ लोग अपने बाएं हाथ से क्यों लिखते हैं?

दुनिया भर में लोगों के लिए अब ये एक अनसुलझी पहले बनी हुई थी.

लेकिन अब ब्रितानी वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि इसके लिए इंसानी जीन ज़िम्मेदार हैं.

इंसानों के डीएनए में जीन एक तरह के सुझाव देता है जो कि किसी व्यक्ति के लेफ़्ट हैंडी होने से जुड़ा होता है.

ये सुझाव इंसानी दिमाग़ की बनावट और उसके काम करने के तरीके एवं भाषाई क्षमता पर असर डालते हैं.

ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि इस वजह से लेफ़्ट हैंड से अपने काम करने वालों की बोलने-चालने की क्षमता भी बेहतर हो सकती है.

चिप्स खाकर युवा ने गंवाई आंखों की रोशनी

चिप्स खाकर युवा ने गंवाई आंखों की रोशनी

जान पहचान के दायरे में आपने भी ऐसे बच्चों को देखा होगा जो खाना देखते ही नाक भौं सिकोड़ने लगते हैं, खाना नहीं खाने के लिए बहाने बनाते हैं.

ऐसा करते हुए वे अमूमन खाना नहीं खाते और कई बार यह उनकी दिनचर्या में शामिल हो जाता है. अमूमन ऐसे बच्चे जंक फूड से अपना काम चलाने लगते हैं.

अगर आपके बच्चे में ऐसी आदत पनप गई हो तो आपको सचेत होने की जरूरत है. ब्रिटेन में 17 साल के एक युवक की आंखों की रोशनी महज इसलिए चली गई क्योंकि वह युवा केवल चिप्स खा रहा था.

प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद से ही यह बच्चा केवल फास्ट फूड पर निर्भर था.

स्मार्टफोन, टैबलेट को बनाएं अपना दफ़्तर

स्मार्टफोन, टैबलेट को बनाएं अपना दफ़्तर

स्मार्टफोन, टैबलेट को बनाएं अपना दफ़्तर
कई युवा ऐसे हैं जो घर से काम कर रहे हैं. कहीं भी, कभी भी काम करने की सहूलियत उनके लिए काफी मायने रख़ती है.
एंड्रॉएड पर ऐसे कई ऐप हैं जिनकी मदद से स्मार्टफोन या टैबलेट पर सभी काम किये जा सकते हैं.
अब रोज़ रोज़ के ऑफिस जाने के झंझट से भी आपको छुटकारा मिल सकता है. लेकिन ये आदत बदलना आसान नहीं है.
लैपटॉप और डेस्कटॉप कंप्यूटर की आदत को अगर बदलने को आप तैयार हैं तो कहीं भी कभी भी काम करना मुश्किल नहीं है.

जब ख़त्म हुए डायनासोर, कैसा था पृथ्वी पर वो आख़िरी दिन?

जब ख़त्म हुए डायनासोर, कैसा था पृथ्वी पर वो आख़िरी दिन?

पृथ्वी पर सबसे विनाशकारी दिनों में से एक के बारे में वैज्ञानिकों को नए साक्ष्य मिले हैं. वैज्ञानिकों ने मैक्सिको की खाड़ी से मिले एक 130 मीटर की चट्टान के एक टुकड़े का परीक्षण किया है. इस चट्टान में मौजूद कुछ ऐसे तत्व मिले हैं जिनके बारे में बताया जा रहा है कि 6.6 करोड़ साल पहले एक बड़े क्षुद्रग्रह (ऐस्टरॉइड) के पृथ्वी से टकराने के बाद यह जमा हुई थी.

इसके प्रभाव का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह वही उल्कापिंड है जिसके कारण विशालकाल डायनासोर विलुप्त हो गए थे. इस उल्का पिंड से टकराने से वहां 100 किलोमीटर चौड़ा और 30 किलोमीटर गहरा गड्ढा बन गया था.

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