Anand's blog

क्या ये इंसानों की नई प्रजाति है?

क्या ये इंसानों की नई प्रजाति है?

चीन में पिछले दिनों विचित्र किस्म का जीवाश्म मिला, जो अब तक मालूम मानव प्रजाति के जीवाश्म से मेल नहीं खाता. क्या यह जीवाश्म किसी नए जीव के अस्तित्व की ओर इशारा करता है?

ये जीवाश्म न तो यूरोप में 35 हजार से डेढ़ लाख साल पहले मिले आदिमानव से मेल खाता है और न आधुनिक मानव से.

यह एकदम अलग है, पर जीवाश्म किस जीव का है, इसे लेकर कुछ भी तय नहीं है.

हालांकि जीवाश्म से संकेत मिलते हैं कि कोई अज्ञात प्रजाति के मानवों का अस्तित्व 60 हज़ार से एक लाख 20 हज़ार साल पहले मौजूद था.

मुमकिन है कि ये जीवाश्म किन्हीं दो मालूम प्रजातियों के बीच रूपांतरण काल का हो सकता है.

दिल को बीमार करने वाला ख़तरनाक जीन

दिल को बीमार करने वाला ख़तरनाक जीन

तनाव के लिए ज़िम्मेदार एक जीन को हृदयघात या दिल की बीमारी में मौत का ख़तरा बढ़ाने वाला क़रार दिया गया है.

हृदय के जिन मरीजों में जीन संबंधी ऐसे बदलाव होते हैं, उनमें दिल के दौरे का खतरा 38 फ़ीसदी बढ़ जाता है. ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन का कहना है कि इस अध्ययन से सीधे तौर पर तनाव के कारण हृदय संबंधी बीमारियों का ख़तरा बढ़ने का प्रमाण और पुख़्ता होता है.

ड्यूक यूनीवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ मेडिसिन की एक टीम ने मानव जीनोम के उस डीएनए का अध्ययन किया, जो तनाव से जुड़ा होता है. उन्होंने पाया कि जीन में परिवर्तन होने पर दिल के मरीज़ों में दौरा पड़ने या मौत का ख़तरा 38 फ़ीसदी बढ़ जाता है.

दिल को बीमार करने वाला ख़तरनाक जीन

दिल को बीमार करने वाला ख़तरनाक जीन

तनाव के लिए ज़िम्मेदार एक जीन को हृदयघात या दिल की बीमारी में मौत का ख़तरा बढ़ाने वाला क़रार दिया गया है.

हृदय के जिन मरीजों में जीन संबंधी ऐसे बदलाव होते हैं, उनमें दिल के दौरे का खतरा 38 फ़ीसदी बढ़ जाता है. ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन का कहना है कि इस अध्ययन से सीधे तौर पर तनाव के कारण हृदय संबंधी बीमारियों का ख़तरा बढ़ने का प्रमाण और पुख़्ता होता है.

ड्यूक यूनीवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ मेडिसिन की एक टीम ने मानव जीनोम के उस डीएनए का अध्ययन किया, जो तनाव से जुड़ा होता है. उन्होंने पाया कि जीन में परिवर्तन होने पर दिल के मरीज़ों में दौरा पड़ने या मौत का ख़तरा 38 फ़ीसदी बढ़ जाता है.

नगालैंड में सिर काटने वाला क़बीला

नगालैंड में सिर काटने वाला क़बीला

लोंगवा घने जंगलों के बीच म्यांमार सीमा से लगता भारत का आख़िरी गांव है. भारत के इस पूर्वोत्तर राज्य में 16 जनजातियां रहती हैं.

नगालैंड में सबसे अधिक कबीले
कोंयाक आदिवासियों को बेहद खूंखार माना जाता है. अपने क़बीले की सत्ता और ज़मीन पर क़ब्जे के लिए वे अक्सर पड़ोस के गांवों से लड़ाईयां किया करते थे.

कोंयाक गांव क्योंकि पहाड़ की चोटी पर है, इसलिए वे वहाँ से आसानी से अपने दुश्मनों पर नज़र रख सकते हैं.

सेहत के लिए खड़े रहना अच्छा

सेहत के लिए खड़े रहना अच्छा

अनुमान लगाइए कि आप दिन भर में कितने घंटे बैठे-बैठे गुजारते हैं? हाल में किए गए एक सर्वे में पता चला है कि हम कंप्यूटर पर काम करते हुए या टीवी देखते हुए करीब 12 घंटे बैठे हुए बिता देते हैं. यदि इसमें सोने के घंटों को भी मिला लें, तो हम 19 घंटे निष्क्रिय बिता देते हैं. कुछ अध्ययनों के अनुसार ज्यादा घंटे बैठने वाले लोग ज्यादा सक्रिय लोगों से दो साल कम जीते हैं. बल्कि यदि आपको रोज कसरत की भी आदत हो तो भी इससे खास फर्क नहीं पड़ता.

दिमाग़ की उत्तेजना दिल के लिए फायदेमंद!

दिमाग़ की उत्तेजना दिल के लिए फायदेमंद!

दिमाग़ के एक हिस्से की उत्तेजना दिल के लिए फायदेमंद हो सकती है.

'प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंस' में प्रकाशित इस रिसर्च पेपर के अनुसार दिमाग़ का जो हिस्सा शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करता है, उसके उत्तेजित होने से दिल का दौरा पड़ने के बाद मरीज़ की हालत सुधर सकती है.

अध्ययन में चूहे के दिमाग़ पर तेज़ रोशनी डाली गई. ये चूहे उन जानवरों की तुलना में तेजी से दौड़ने लगे जिन पर यह प्रयोग नहीं आज़माया गया था.

भुलक्कड़ नहीं कहलाना है तो कसरत करें

भुलक्कड़ नहीं कहलाना है तो कसरत करें

70 साल की उम्र में भी दिमाग ठीक से काम कर सके और 'डिमेनशिया' यानी भूलने जैसी बीमारी ना हो इसके लिए ज़रूरी है व्यायाम करना.

लेकिन, बुढ़ापे में दिमाग दुरुस्त रखने के लिए ज़रूरी नहीं कि दिमागी कसरत ही की जाए. 70 की उम्र में रोजाना शारीरिक व्यायाम भी दिमाग़ को दुरुस्त रख सकता है.

ब्रिटेन में सेवानिवृत्त हो चुके 668 लोगों पर तीन वर्षों तक किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि वे लोग जो शारीरिक रूप से क्रियाशील हैं, उनके दिमाग में किसी तरह का संकुचन नहीं होता और उम्र अपना असर नहीं दिखाती.

आप 'टालूराम' हैं तो ये ज़रूर पढ़ें

आप 'टालूराम' हैं तो ये ज़रूर पढ़ें

क्या आपको काम टालने की आदत है? काम पूरा करने में अक्सर देर हो जाती है? मैं तो अक्सर काम टालती थी, काम पूरा करने में देर लगाती थी.

इसलिए मैने तय किया है कि मैं दिमाग़ी प्रशिक्षण लूँगी ताकि भटकते मन से पैदा होने वाली समस्याओं से निजात पा सकूँ. लेकिन क्या ये संभव है?

अपनी एकाग्रता बढ़ाने और मन को भटकने से रोकने के लिए मैं अमरीका की बोस्टन अटेंशन एंड लर्निंग लैब में पहुँची. दिमाग़ पर शोध करने वाले वैज्ञानिक माइक ईस्टरमैन और जो दीगुटिस ने पिछले सात साल में दिमाग़ का प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया है जो एकाग्रता बढ़ाता है.

क्या दूसरे दिल की सुनता है दिमाग़?

क्या दूसरे दिल की सुनता है दिमाग़?

जब किसी आदमी को नया दिल लगाया जाता है, तो उसका दिमाग़ भी असामान्य रूप से बदल जाता है. क्यों?

इससे हमारे पूरे शरीर के बारे में हैरान करने वाले तथ्यों का पता चला.

कार्लोस (बदला हुआ नाम) के शरीर में एक छोटा यांत्रिक पंप (दूसरा दिल) लगाया गया था ताकि उसके दिल की कमज़ोर हो चुकी मांसपेशियों का बोझ कम किया जा सके.

कार्लोस को अपने पेट पर एक हल्की 'टक्कर' महसूस होती थी जो उनके दूसरे दिल की धड़कन थी.

ऐसा लगता था कि मशीन की थाप ने उनकी नब्ज की जगह ले ली हो. जब नाभि के ऊपर मशीन धड़कती तो कार्लोस को ऐसा लगता कि उनके दिल को पेट के निचले हिस्सा में गिरा दिया गया है.

क्या दूसरे दिल की सुनता है दिमाग़?

क्या दूसरे दिल की सुनता है दिमाग़?

जब किसी आदमी को नया दिल लगाया जाता है, तो उसका दिमाग़ भी असामान्य रूप से बदल जाता है. क्यों?

इससे हमारे पूरे शरीर के बारे में हैरान करने वाले तथ्यों का पता चला.

कार्लोस (बदला हुआ नाम) के शरीर में एक छोटा यांत्रिक पंप (दूसरा दिल) लगाया गया था ताकि उसके दिल की कमज़ोर हो चुकी मांसपेशियों का बोझ कम किया जा सके.

कार्लोस को अपने पेट पर एक हल्की 'टक्कर' महसूस होती थी जो उनके दूसरे दिल की धड़कन थी.

ऐसा लगता था कि मशीन की थाप ने उनकी नब्ज की जगह ले ली हो. जब नाभि के ऊपर मशीन धड़कती तो कार्लोस को ऐसा लगता कि उनके दिल को पेट के निचले हिस्सा में गिरा दिया गया है.

मौत के मुंह से वापस लाने का जुनून

मौत के मुंह से वापस लाने का जुनून

क्या मरीज के शरीर में खून की जगह ठंडे नमकीन पानी के प्रवाह से उसे मौत के मुँह से वापस लाया जा सकता है ?

यूनिवर्सिटी ऑफ़ एरिज़ोना (ट्यूसौन) के पीटर री का तो यही दावा है.

वो कहते हैं, "जब आपके शरीर का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस हो, दिमाग सुन्न पड़ गया हो, धड़कन बंद हो गई हो - तो हर कोई मानेगा कि आप मर गए हैं…..लेकिन हम आपको मौत के मुंह से वापस ला सकते हैं."

री बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बोल रहे हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेरीलैंड के सैमुअल तिशरमैन के साथ उन्होंने दिखाया है कि शरीर को कई घंटों तक ऐसी स्थिति में रखना संभव है.

मौत के मुंह से वापस लाने का जुनून

मौत के मुंह से वापस लाने का जुनून

क्या मरीज के शरीर में खून की जगह ठंडे नमकीन पानी के प्रवाह से उसे मौत के मुँह से वापस लाया जा सकता है ?

यूनिवर्सिटी ऑफ़ एरिज़ोना (ट्यूसौन) के पीटर री का तो यही दावा है.

वो कहते हैं, "जब आपके शरीर का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस हो, दिमाग सुन्न पड़ गया हो, धड़कन बंद हो गई हो - तो हर कोई मानेगा कि आप मर गए हैं…..लेकिन हम आपको मौत के मुंह से वापस ला सकते हैं."

री बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बोल रहे हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ़ मेरीलैंड के सैमुअल तिशरमैन के साथ उन्होंने दिखाया है कि शरीर को कई घंटों तक ऐसी स्थिति में रखना संभव है.

ये स्तनधारी कभी पार्टनर को धोखा नहीं देता

ये स्तनधारी कभी पार्टनर को धोखा नहीं देता

ज़्यादातर जानवर आम तौर पर जोड़ों के बंधनों में नहीं बंधते. पांच फ़ीसदी से कम जानवर ही जोड़े में बंधते हैं, इनमें से ज़्यादातर अपने पार्टनर को ख़ूब धोखा भी देते हैं.

लेकिन यूरोप में पाए जाने वाले उदबिलाव ऐसे नहीं होते. उदबिलाव का एक जोड़ा जिंदगी भर एक दूसरे के प्रति वफ़ादारी निभाता है.

चेक गणराज्य के प्राग स्थित चार्ल्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर अध्ययन किया है.

उन्होंने रूस के किरोव क्षेत्र में उदबिलावों की कई बसावटों का अध्ययन किया और इस नतीजे तक पहुंचे.

नन्हे दिल बचाएंगे लाइलाज बीमारी से

नन्हे दिल बचाएंगे लाइलाज बीमारी से

स्कॉटलैंड के वैज्ञानिकों ने चिकित्सा संबंधी शोध के लिए सैंकड़ों की संख्या में लघु मानव हृदय तैयार किए हैं.

इन हृदय कोशिकाओं के दोनों नन्हे वॉल्व हर दो सेकेंड पर एक साथ धड़कते हैं. इनके ऊतक इंसान के दिल की पेशियों से मेल खाते हैं.

अबर्टे यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता इन छोटे छोटे दिलों का इस्तेमाल लाइलाज बीमारियों में संभावित दवाओं के असर की जांच के लिए करेंगे.

इस शोध को स्पेन के वेलेंशिया में बायोटेक्नोलॉजी पर हो रही वर्ल्ड कांग्रेस में पेश किया जाएगा.

इन की कोशिकाओं का बाहरी घेरा (स्फेयर) स्टेम कोशिकाओं से बना है और यह मात्र एक मिलीमीटर चौड़ा है.

क्या जूस पीने से सेहत ठीक रहती है?

क्या जूस पीने से सेहत ठीक रहती है?

तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में हर काम फ़टाफ़ट होना चाहिए. तो, खान-पान ही तसल्ली से क्यों हो? फल खाने में वक़्त क्यों ज़ाया किया जाए?

फलों का जूस निकाला, पिया और चल पड़े काम पर. समय भी बचेगा और सेहत का भी भला होगा.

वाक़ई?

क्या फलों का रस निकालकर पीना वाक़ई सेहतमंद है?

आज कामकाजी लोगों के बीच फलों का रस पीने का बहुत चलन है. व्यस्तता के बीच चबाकर खाने के लिए वक़्त जो नहीं है.

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तो, सुबह-सुबह जूस गटका औऱ काम पर लग गए. सेहत की फ़िक्र भी दूर हुई. बहुत से लोग तो ये भी दावा करते हैं कि जूस आप के शरीर को डिटॉक्स भी करते हैं.

शाकाहारी हुई दुनिया तो हर साल 70 लाख तक कम मौतें

शाकाहारी हुई दुनिया तो हर साल 70 लाख तक कम मौतें

दुनिया भर में 12 जून का दिन विश्व मांस मुक्त दिवस के रूप में मनाया गया. अगर दुनिया अचानक हमेशा के लिए शाकाहारी हो जाए तो इसका असर क्या होगा?

हम यहां बता रहे हैं कि इससे जलवायु, वातावरण, हमारी सेहत और अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा.

एक ऑटोसेक्शुअल लड़की की कहानी

ये सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है कि मैं हमेशा ख़ुद को देखकर ही आकर्षित होती हूं.

बाकी टीनेजर्स की तरह मुझे भी अपने व्यक्तित्व और लुक की चिंता रहती है. जब भी मैं नहा कर आती हूं, कपड़े पहनती हूं या फिर सेक्शुअल अट्रैक्शन की खोज में होती हूं तो ख़ुद को आईने में देखती हूं.

हो सकता है मेरा शरीर आकर्षित करने वाला न हो. मैं पतली हूं, मेरी ठोडी बहुत लंबी है, मेरे बाल घुंघराले हैं. लेकिन बिना कपड़े के मेरा शरीर मुझे वाक़ई आकर्षित करता है.

पैसे वाले अकेले क्यों होते हैं?

पैसे वाले अकेले क्यों होते हैं?

लोग अक्सर एक-दूसरे को कहते हैं कि पैसे के पीछे मत भागो, अकेले रह जाओगे. फिर भी पूरी दुनिया में लोग पैसे के पीछे ही दीवानों की तरह भागते नज़र आते हैं.

अक्सर हम देखते हैं कि जिन लोगों के पास बहुत सारा पैसा होता है, वो अकेले हो जाते हैं. सिर्फ़ चापलूस और मतलबी लोग उनके क़रीब रह जाते हैं.

आख़िर ऐसा क्यों होता है?

इस सवाल का जवाब कुछ मिसालों से तलाशने की कोशिश करते हैं.

फ़ेसबुक छोड़ो, सुख से जियो

फ़ेसबुक छोड़ो, सुख से जियो

आप अपनी लाइफ़ में खुश रहना चाहते हैं, तो कुछ दिनों के लिए फ़ेसबुक को हाथ मत लगाइए.

ऐसा डेनमार्क के कोपनहेगन विश्वविद्यालय में की गई ताज़ा रिसर्च के आधार पर कहा जा रहा है.

मॉर्टन ट्रॉमहोल्ट ने मास्टर की अपनी थीसिस में लिखा है, "ज़्यादातर लोग रोज़ाना फ़ेसबुक का इस्तेमाल करते हैं, पर उन्हें इसके नतीजों की जानकारी नहीं है. इस रिसर्च में यह पाया गया है कि फ़ेसबुक के इस्तेमाल से आपकी खुशी कम हो जाती है."

ट्रॉमहोल्ट ने साल 2015 के अंत में 1,095 लोगों पर अपना अध्ययन किया. इसमें आधे लोगों से कहा गया कि वे एक हफ़्ते तक फ़ेसबुक से दूर रहें.

...तो इसका नतीजा क्या हुआ?

गुदगुदी करने पर आदमी की तरह क्यों हंसते हैं चिम्पैंज़ी?

गुदगुदी करने पर आदमी की तरह क्यों हंसते हैं चिम्पैंज़ी?

कभी आपने सोचा है कि हमें हंसी क्यों आती है? शरीर के किसी ख़ास हिस्से को छूने पर गुदगुदी क्यों होती है?

नहीं सोचा ना?

तो चलिए, आज हंसी और गुदगुदी की ही बात करते हैं.

इंसानों के पुरखे बंदरों के रिश्तेदार थे, ये तो हम सब जानते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि इंसान को हंसने का हुनर भी बंदर परिवार से ही विरासत में मिला है.

हम ख़ुश होते हैं तो हंसते हैं. कोई बात अच्छी लगती है तो मुस्कुराते हैं. तो क्या ये सब चिम्पैंज़ी, बोनबोन जैसे प्राइमेट्स यानी वानर परिवार के सदस्यों के साथ भी होता है?

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