क्या ये इंसानों की नई प्रजाति है?

चीन में पिछले दिनों विचित्र किस्म का जीवाश्म मिला, जो अब तक मालूम मानव प्रजाति के जीवाश्म से मेल नहीं खाता. क्या यह जीवाश्म किसी नए जीव के अस्तित्व की ओर इशारा करता है?
ये जीवाश्म न तो यूरोप में 35 हजार से डेढ़ लाख साल पहले मिले आदिमानव से मेल खाता है और न आधुनिक मानव से.
यह एकदम अलग है, पर जीवाश्म किस जीव का है, इसे लेकर कुछ भी तय नहीं है.
हालांकि जीवाश्म से संकेत मिलते हैं कि कोई अज्ञात प्रजाति के मानवों का अस्तित्व 60 हज़ार से एक लाख 20 हज़ार साल पहले मौजूद था.
मुमकिन है कि ये जीवाश्म किन्हीं दो मालूम प्रजातियों के बीच रूपांतरण काल का हो सकता है.
पृथ्वी पर आदिम दौर में चार मानव प्रजातियों का अस्तित्व था. तब तक आधुनिक इंसान का पता नहीं चला था. यूरोप में मिले इन अवशेषों को निएंडरथल कहते हैं, जबकि एशिया में रह रहे आदिम इंसानों को डेनिसोवांस कहते थे.
एक प्रजाति इंडोनेशिया में मिले आदिम इंसानों की भी है, जिसे हॉबिट कहते हैं. इनके अलावा एक रहस्यमय चौथा समूह भी था, जो यूरोप और एशिया में रहते थे. यह समूह डेनिसोवांस का संकर समूह माना जाता था.
अब चीन में नए जीवाश्म मिलने से तस्वीर कुछ और धुंधली हो गई है.
इस जीवाश्म का पता पहली बार 1976 में शूजियाओ के गुफाओं में मिला. इसमें कुछ खोपड़ियों के टुकड़े और चार लोगों के नौ दांतों के जीवाश्म मिले थे. इसका पूरा विवरण अमरीकी फिज़िकल एंथ्रापोलॉजी जर्नल में छपा है.
मिनिएचर में लैंडस्केप
स्पेन के बुर्गोस के नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन ह्यूमन इवॉल्यूशन के मारिया मार्टिनन टॉरैस और उनके सहकर्मियों ने इन दांतों का अध्ययन किया और मालूम मानव प्रजाति के क़रीब 5000 दांतों के नमूनों से इसका मिलान किया.
मार्टिनन टॉरैस कहती हैं, "ये दांत मिनिएचर पेंटिंग में लैंडस्केप की तरह दिखते हैं. इसके स्लोप, खांचे और खाई सब मिलकर ऐसा फ़ीचर बनाते हैं, जो किसी आबादी समूह का हो सकता है."
हालांकि इतना साफ़ है कि ये जीवाश्म किसी आधुनिक मानव प्रजाति के दांतों से मेल नहीं खाते. मगर कुछ गुण निश्चित ही आदिम प्रजाति के इंसानों से मिलते हैं. कुछ अंश निएंडरथल से मेल खाते हैं.
नई प्रजाति?
मार्टिनन टॉरैस इसे नई प्रजाति कहने का दावा नहीं करतीं.
उन्होंने कहा, "यह न तो होमो सेपियंस का है, न होम्यो निएंडरथलनेसिस. यह बेहद शुरुआती दौर में है. हम इसे नई प्रजाति नहीं कह सकते. हमें कई और चीज़ों को आंकने की ज़रूरत है."
टॉरेस कहती हैं, "हो सकता है कि ये जीवाश्म डेनिसोवांस प्रजाति के हों."
हालांकि डेनिसोवांस प्रजाति का केवल एक जीवाश्म साइबेरिया की गुफा में मिला था, जिसमें दो दांत और एक उंगली की हड्डी शामिल थी.
इसके डीएनए की जांच से पता चला कि निएंडरथल और आधुनिक मानवों से अलग हैं और इसमें दोनों की खूबियां शामिल हैं. टॉरेस के मुताबिक़ शूजियाओ में मिले दांत का पैटर्न भी कुछ वैसा ही है.
मतभेद
ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के डैरेन क्यूरनो कहते हैं, "संकेत मिल रहे हैं कि यह एकदम नई प्रजाति के जीवाश्म हैं. मेरे मन में इसे लेकर कोई संदेह नहीं है."
डैरेन क्यूरनो के मुताबिक़ दांत की सतह से ज़ाहिर होता है कि ये नई प्रजाति के जीवाश्म हैं. क्यूरनो पहले भी चीन की एक रहस्यमयी प्रजाति रेड डीयर केव पीपल के बारे में विस्तार से बता चुके हैं.
केंट यूनिवर्सिटी, ग्रेट ब्रिटेन के मैथ्यू स्कीनर के मुताबिक़ एशिया में मिले जीवाश्म के अंश इतने तितर-बितर होते हैं कि उनके ज़रिए प्रजाति का पता लगाना मुश्किल होता है.
खोजबीन की ज़रूरत
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के फ्रेड स्पूर स्कीमर की राय से सहमत दिखते हैं. वे कहते हैं, "जीवाश्म में आधुनिक और आदिम अवशेष हैं. यह हाइब्रिड जैसा है. हालांकि यह पूरी तरह अनुमान है."
सेंट लुई मिजूरी स्थित वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसेर इरिक ट्रिंकॉस के मुताबिक़ जीवाश्म के रिकॉर्ड में कुछ गैप है क्योंकि अवशेष का हिस्सा नष्ट हो चुका है.
जर्मनी के लीपज़िग के मैक्स प्लॉन्क इंस्टीट्यूट फॉर इवॉल्यूशनरी एंथ्रोपोलॉजी के मैथियास मेयर कहते हैं कि जवाब जीवाश्म की डीएनए रिपोर्ट से मिलेगा.
टॉरेस के मुताबिक़ एशियाई जीवाश्म का ज़्यादा से ज़्यादा विश्लेषण नतीजे तक पहुंचाएगा. क्यूरनो के मुताबिक़ पूर्वी एशिया की काफ़ी समय तक उपेक्षा हुई है.
वह कहते हैं, "हमें कुछ अचरज भरे नतीजों के लिए तैयार होना चाहिए जो यूरोप और अफ़्रीका के जीवाश्म को लेकर परंपरागत समझ से अलग होंगे
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