पहिया आख़िर किसने बनाया और इसके आविष्कार में देर क्यों लगी?

इंसानों के लिए पहिया बेहद महत्वपूर्ण आविष्कार है. इतना ज्यादा कि इसके बिना दुनिया की कल्पना नहीं की जा सकती.
असंख्य मशीनों में पहियों को इस्तेमाल किया जाता है. मगर यह पहिया आया कहां से?
पहिया यानी एक ऐसा यांत्रिक पुर्ज़ा जो चक्र के आकार का होता है और एक धुरी पर घूमता है.
सबसे पुराने पहिये के सबूत 3500 ईसा पूर्व के हैं, जो प्राचीन मेसोपोटामिया में पाए गए थे. इन पहियों को मिट्टी के बर्तन बनाने वाले इस्तेमाल करते थे. हर जगह पहिये को लेकर जो साक्ष्य मिले हैं, उनसे पता चलता है कि पहिया बहुत सी चीज़ों से अपेक्षाकृत नया आविष्कार है.
पहिये के जिस वक़्त के सबूत मिलते हैं, उस वक़्त तक इंसान पेचीदा समाज विकसित कर चुका था जिसमें आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक प्रणालियां मौजूद थीं. जानवरों को पालतू बना लिया गया था और कई सदियों से खेती की जा रही थी.
इस दौरान तक हमने सिलने वाली सुइयां, कपड़े, टोकरियां, बांसुरियां और नाव वगैरह बनाना सीख लिया था. फिर पहिये के आविष्कार में इतनी देर कैसे लगी?
कहां से मिली प्रेरणा?
विशेषज्ञ इस देरी की वजह यह बताते हैं कि पहिये प्राकृतिक तौर पर नहीं पाए जाते.
विशेषज्ञ बताते हैं कि इंसान को ज़्यादातर आविष्कारों की प्रेरणा भौतिक संसार से मिली थी. मगर प्राकृतिक तौर पर ऐसे उदाहरण नहीं मिलते, जिससे कि इंसान यह प्रेरणा मिले कि पहिये काम के साबित हो सकते हैं. ऐसे में पहिया बनाना इंसान की आविष्कार करने की योग्यता का उदाहरण है.
'द होर्स, व्हील एंड लैंग्वेज' के लेखक मानवविज्ञानी डेविड एंथनी बताते हैं, "यह बात ध्यान देने वाली है कि बात यहां किसी लुढ़कने वाले बेलन को बनाने की नहीं, ब्लिक ऐसे पहिये की है जो एक धुरी पर घूमता हो.
वह कहते हैं कि पहिया तभी बनता, जब उस बेलन या चक्र को एक किसी स्थिरता देने वाली चीज़ से जोड़ा जाता.
बर्तन बनाने में इस्तेमाल
मानव द्वारा सबसे पहले इस्तेमाल किए गए पहिए हज़ारों साल तक बर्तन बनाने की विधा में इस्तेमाल किए गए. केंद्र में रहे. पहले लेथ मशीनें बनाई गईं. इन्हें बर्तन बनाने वाले हाथ या पैर से घुमाते थे.
कुछ सदियों बाद, ईसा से तीन सहस्राब्दी पहले बर्तन बनाने वालों ने लेथ या पहियों की मदद से चक्कों का इस्तेमाल शुरू कर दिया. वे भारी पत्थर इस्तेमाल करने लगे ताकि घूमने से ज्यादा ऊर्जा तैयार हो.
इसी विचार में संशोधन करके वाहन बनाने की बात सोचना एक चुनौती थी. इसके लिए तेज़ समझ की जरूरत थी. ऐसा सिर्फ धातु के औज़ारों से ही किया जा सकता था.
कमाल की विशेषज्ञता
पहियों को ऐसे घुमाने के लिए कि घर्षण की वजह से अड़चन न हो, यह ज़रूरी था कि बीच में गोल छेद हो. साथ ही जिस डंडे पर यह पहिया लगाना हो, उसका भी गोल और नरम होना जरूरी था.
यही नहीं, डंडे का सही से फिट होना भी जरूरी था. ज्यादा ढीला हुआ तो पहिये लड़खड़ाते रहेंगे, ज्यादा कसाव हुआ तो वे ढंग से घूमेंगे ही नहीं.
डंडे की मोटाई भी ज्यादा नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे ज्यादा घर्षण पैदा होता. ज्यादा पतला होता तो यह टूट ही जाता.
एंथनी अपनी किताब में समझाते हैं, "भारी चीज़ों को उठाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों में कम व्यास वाली छोटी और कम लंबाई वाली शाफ़्ट लगाना कारगर था. इसीलिए शुरुआती छकड़ों में यह शाफ़्ट एक मीटर ही लंबी थी."
विशेषज्ञ कहते हैं कि इस बात को लेकर संदेह है कि इतना नाज़ुक सिस्टम बनाने का विकास कई चरणों में हुआ होगा. उनके मुताबिक इसके ढाचें को एक बार में ही तैयार किया गया होगा.
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अचानक हुआ पहियों का प्रसार
शायद यह कभी पता नहीं चल पाएगा कि सबसे पहले पहिया किसने बनाया. मगर पुरातात्विक सबूत बताते हैं कि यह आविष्कार यूरेशिया और मध्य पूर्व में तेज़ी से फैला.
वह कहते हैं, "3400 ईसा पूर्व से पहिए के इस्तेमाल के असंख्य सबूत मिलते हैं. रथ और चौपहिया गाड़ियों के रूप में इनके कई चित्र मिलते हैं और छकड़ों के कई मॉडल देखने को मिलते हैं. पहियों और उनके लकड़ी के एक्सलों के नमूने भी मिलते हैं."
पहियों वाली गाड़ी की सबसे पुरानी तस्वीरें जो मिली हैं, वे 3500-3350 ईसा पूर्व की हैं, जिन्हें मिट्टी के बर्तन को सजाने के लिए बनाया गया था. ये ट्रिक्टरबेकर संस्कृति की हैं. यह संस्कृति आज के पॉलैंड, पूर्वी जर्मनी और दक्षिणी डेनमार्क में हुआ करती थी.
इस इलाके और मेसोपोटामिया (इराक) के बीच इस बात को लेकर विवाद है कि सबसे पहले पहिया किसके यहां बना.
चार पहियों वाले छकड़े के मिट्टी के त्रि-आयामी मॉडल पूर्वी हंगरी की 3310-3100 ईसा पूर्व की कब्रों से मिले हैं. रूस और यूक्रेन में कब्रगाहों से 3000-2000 ईसा पूर्व की 250 कारें भी मिली हैं.
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