लैंडर की गति की वजह से नहीं हुई लैंडिंग

इसरो के पूर्व चेरमैन डॉ. माधवन नायर ने बीबीसी हिंदी से कहा, "फ़ाइनल लैंडिंग इसलिए सफल नहीं हो पाई क्योंकि लैंडर की ऊंचाई को सही तरीक़े से बरक़रार रखने में गलती हुई. यह बहुत गति से नीचे की ओर गिरा. तो यह मिशन का एक छोटा हिस्सा था जो सफल नहीं हो पाया."
डॉ. नायर इस बात पर ध्यान दिलाते हैं कि अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण के बाद, लैंडर और ऑर्बिटर का अलग होना, ऑर्बिटर का चंद्रमा की कक्षा में सही जगह पर स्थापित होने जैसी चीज़ों को भी महत्व दिया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, "शायद, हमारे पास वैश्विक समुदाय द्वारा ली गई चंद्रमा की सतह की बेहतरीन तस्वीर है. लैंडर को बहुत मुश्किल ऑपरेशन मिला था. लैंड कराने के लिए लैंडर की गति को तक़रीबन ज़ीरो तक करना था. यहां तक की चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए लैंडिंग ऑपरेशन बेहद क़रीब था."
चंद्रयान 2 से संपर्क टूटने के बाद क्या हुआ?
डॉ. नायर कहते हैं कि इसी कारण वैज्ञानिकों में आत्मविश्वास था कि 'हम ग़लती को ठीक कर सकते हैं.'
इसरो अधिकारी कहते हैं कि जब मिशन की योजना बनाई जाती है तो उद्देश्यों के बारे में अच्छे से मालूम होता है.
"हर एक चरण को तवज्जो दी जाती है. यह अंतरिक्ष यान की लॉन्चिंग से शुरू हुआ और फिर इसमें ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर भी है. अगर आप ऑर्बिटर के आठ पेलॉड्स से सात सालों तक डाटा प्राप्त करते हैं तो इसका मतलब है कि कई तकनीक काम कर रही हैं.
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