पृथ्वी से 30 लाख गुना बड़ा है ब्लैक होल

पृथ्वी से 30 लाख गुना बड़ा है ब्लैक होल

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने ब्लैक होल की पहली तस्वीर जारी की है. यह गैलैक्सी में लगभग 4000 करोड़ में फैला हुआ है और आकार में पृथ्वी से तीस लाख गुना बड़ा है.

ये तस्वीर इवेंट हॉरिज़न टेलिस्कोप से ली गई है जो आठ टेलिस्कोप का एक नेटवर्क है.

इस प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर हेनियो फ़ैल्के ने बीबीसी को बताया कि ब्लैक होल एम87 गैलेक्सी में पाया गया है.

ये हमारे सोलर सिस्टम से भी बड़ा है और वज़न में सूर्य से 650 करोड़ से ज़्यादा भारी है. ये ब्रह्मांड में मौजूद सबसे बड़ा ब्लैक होल है.

इस तस्वीर में ब्लैक होल के चारों ओर आग का एक गोला नज़र आ रहा है. प्रोफ़ेसर फ़ैल्के इसके बारे में बात करते हुए कहते हैं कि ये बेहद गरम गैसें हैं जो इस ब्लैक होल में जाकर गिरती हैं.

ब्रह्मांड के करोड़ों तारों को मिलाकर जितनी रौशनी होगी यह ब्लैक होल उससे भी ज़्यादा चमकदार है. इसीलिए इसे इतनी दूरी होने का बावजूद टेलीस्कोप के ज़रिए देखा जा सका.

ये तस्वीर विज्ञान की परिभाषाओं और कई हॉलीवुड फ़िल्मों में ब्लैक होल की परिकल्पना से बिलकुल मेल खाती है.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफ़ेसर डॉक्टर ज़िरी यॉन्सी भी ईटीएच कोलैबरेशन का हिस्सा रहे हैं. वो कहते हैं, ''ब्लैक होल अंतरिक्ष और प्रकृति से जुड़े कई जटिल सवाल खड़े करता है, इसके अलावा ब्लैक होल हमारे वजूद से जुड़ा हुआ मुद्दा है. ये बेहतरीन है कि ब्लैक होल हमारी परिभाषाओं में जैसा था वैसा ही तस्वीर में दिखता है. ऐसा लगता है कि एक बार फिर आइन्सटाइन सही थे. ''

क्या होता है ब्लैक होल?

ब्लैक होल अंतरिक्ष का ऐसा हिस्सा है जिससे होकर कुछ भी गुज़र नहीं सकता. यहां तक की प्रकाश भी इसमें गायब हो जाता है.

नाम के उलट ये क्षेत्र खाली नहीं होता बल्कि इसमें कई तरह के पदार्थ होते हैं जो इस इसके क्षेत्रफ़ल को बहुत ज़्यादा गुरुत्वाकर्षण बल देते हैं.

ब्लैक होल से आगे अंतरिक्ष का एक क्षेत्र है जिसे इवेंट होरिज़ोंटल कहा जाता है. इसके आगे जाने वाली कोई भी वस्तु कभी वापस नहीं आती.

प्रो. फ़ैल्के के मन में ब्लैक होल की तस्वीर प्राप्त करने का विचार तब आया था जब वह 1993 में पीएचडी छात्र थे.

उस समय किसी ने भी नहीं सोचा था कि ब्लैक होल की तस्वीर प्राप्त करना संभव होगा. लेकिन प्रो. फ़ैल्के यह महसूस करने वाले पहले व्यक्ति थे.

उन्हें लगता था कि एक प्रकार का रेडियो उत्सर्जन ब्लैक होल के चारों ओर उत्पन्न होगा जो इनता प्रबल होगा कि उसे दूरबीन से देखा जा सकेगा.

वे याद करते हैं कि साल 1973 में उन्होंने एक पेपर पढ़ा था. जिसके मुताबिक ब्लैक होल अपने आकार के 2.5 गुना बड़ा दिखता है.

20 साल की मेहनत के बाद फैल्के ने यूरोपीय रिसर्च काउंसिल से इस प्रोजेक्ट के लिए फ़ंड पाया.

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