घोड़े बेच कर सोती हैं महिलाएँ

घोड़े बेच कर सोती हैं महिलाएँ

आम तौर पर माना जाता है कि महिलाओं की नींद पुरुषों से ख़राब होती है लेकिन नया शोध इस तथ्य को ग़लत साबित करता है.

नए शोध से पता चला है कि महिलाओं को पुरुषों से अधिक नींद आती है और वो पुरुषों की तुलना में अच्छी नींद ले पाती हैं.

बुज़ुर्ग महिलाओं को ऐसा लगता है कि उनकी नींद कम अवधि की होती है और बुज़ुर्ग पुरुषों की तुलना में उन्हें उतनी अच्छी नींद नहीं आती है.

लेकिन अब नए शोध के अनुसार ऐसा बिल्कुल नहीं है. पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक नींद की ज़रुरत होती है.

यह शोध इरासमस मेडिकल सेंटर ने किया है जो स्लीप पत्रिका में छपा है. नीदरलैंड्स के शोधकर्ताओं का कहना है कि जितनी नींद से पुरुषों का काम चल जाता है, ज़रुरी नहीं कि उतनी नींद महिलाओं के लिए भी पर्याप्त हो.

आम अवधारणा ये है कि महिलाओं की नींद पुरुषों से ख़राब होती है लेकिन शोध दर्शाता है कि महिलाएं नहीं बल्कि पुरुषों को कम और ख़राब क्वालिटी की नींद आती है

नील स्टान्ले, नींद विशेषज्ञ

इस शोध में 59-79 उम्र के 56 लोगों को शामिल किया गया. इसमें पाया गया कि महिलाएं पुरुषों से औसतन 16 मिनट अधिक सोती हैं. इतना ही नहीं उनकी नींद कम टूटती है और नींद की क्वालिटी भी पुरुषों की तुलना में अच्छी होती है.

शोधकर्ता दल के प्रमुख डॉ हेनिंग तिमियर का कहना है कि उन्हें ये जानकर आश्चर्य हुआ कि महिलाएं पुरुषों से बेहतर और लंबे समय के लिए सोती हैं.

शोध में हिस्सा लेने वाले लोगों ने एक्टीग्राफ की मदद से नींद को मापा. एक्टीग्राफ एक घड़ी की तरह काम करता है जो औसतन छह दिन की नींद मापता है.

शोध में पाया गया कि पुरुषों का मानना था कि वो औसतन रात में क़रीब सात घंटे सोए जबकि असल में वो छह घंटे 40 मिनट ही सोए थे.

दूसरी तरफ़ महिलाओं का मानना था कि वो 6.79 घंटे सोईं जबकि वो औसतन 6.55 घंटे सोईं थीं.

इसके अलावा यह भी पाया गया कि सोने के लिए महिलाएं दवाइयों का इस्तेमाल पुरुषों की तुलना में अधिक करती हैं और इसी कारण उन्हें लगता है कि वो कम सो पाती हैं.

नींद के विशेषज्ञ डॉ नील स्टान्ले कहते है, ‘‘आम अवधारणा ये है कि महिलाओं की नींद पुरुषों से ख़राब होती है लेकिन शोध दर्शाता है कि महिलाएं नहीं बल्कि पुरुषों को कम और ख़राब क्वालिटी की नींद आती है.

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